संस्कृति प्रकाशन
नमस्कार! संस्कृति प्रकाशन में आप का स्वागत है।
हमारी आने वाली शीघ्र प्रकाश्य पुस्तके - गायत्री-तन्त्रम्, शिवस्वरोदय एवं अष्टावक्रगीता
पूज्य पिता पं. रामचन्द्र चतुर्वेदी जी की हार्दिक इच्छा थी कि मेरे वंशज ‘काव्यशास्त्रविनोदेन कालोगच्छति धीमताम्’ का अनुसरण करें। उनके दिए संस्कारों के फलस्वरूप मैं उमाशंकर चतुर्वेदी संस्कृत विद्या के अध्ययन की ओर उन्मुख हुआ। व्याकरणाचार्य करने के साथ ही श्री आदर्श सेवा संस्कृत विद्यालय, ईश्वरगंगी वाराणसी में अध्यापक हो गया। |
छात्र-जीवन में हिन्दी साहित्य के विश्व-विश्रुत कथाकार पं. द्विजेन्द्रनाथ मिश्र ‘निर्गुण’ के सानिध्य में आया परिणामत: मेरे अन्दर का साहित्यकार पुष्पित-पल्लवित होने लगा। ‘हल्दीघाटी’, ‘जौहर’ के प्रणेता ‘वीर-रसावतार’ पं. श्यामनारायण पाण्डेय जी का आशीर्वाद भी मिला। कविता, कहानी व निबन्ध की राह पकड़कर चलता रहा कि मन में जिज्ञासा हुई कि क्यों न एक ऐसा प्रकाशन स्थापित किया जाए जो अपनी भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक ग्रन्थों के साथ ही हिन्दी एवं संस्कृत के सत्साहित्य का प्रकाशन करे जो शुद्धता की दृष्टि से लोकप्रिय हो। मित्रों, परिवार के सदस्यों ने उत्साह बढ़ाया।

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